NCERT Class 10th Science Chapter-3 Notes (धातु एवं अधातु)




Chapter – 3   धातु एवं अधातु

धातु :-

  • पदार्थ जो कठोर , चमकीले , आघातवर्ध्य , तन्य , ध्वानिक और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं , धातु कहलाते हैं ।
  • जैसे :- सोडियम ( Na ) , पोटाशियम ( K ) , मैग्नीशियम ( Mg ) , लोहा ( Fc ) , एलूमिनियम ( AI ) , कैल्शियम ( Ca ) , बेरियम ( Ba ) धातुऐं हैं ।


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धातुओं के उपयोग :-  धातुओं का उपयोग इमारत , पुल , रेल पटरी को बनाने में , हवाईजहाज , समुद्री जहाज , गाड़ियों के निर्माण में , घर में उपयोग होने वाले बर्तन , आभूषण , मशीन के पुर्जे आदि के निर्माण में किया जाता है ।

अधातु :-

  • जो पदार्थ नरम , मलिन , भंगुर , ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं , एवं जो ध्वानिक नहीं होते हैं अधातु कहलाते हैं ।
  • जैसे :- ऑक्सजीन ( O ) , हाइड्रोजन ( H ) , नाइट्रोजन ( N ) , सल्फर ( S ) , फास्फोरस ( P ) , फ्लूओरीन ( F ) , क्लोरीन ( CI ) , ब्रोमीन ( Br ) , आयोडिन ( I ) , अधातुऐं हैं ।

अधातुओं के उपयोग :ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए आवश्यक है , जिसे सजीव श्वसन के समय अन्दर लेते हैं ।नाइट्रोजन का उपयोग उर्वरकों में पौधों की वृद्धि हेतु किया जाता है । क्लोरीन का उपयोग जल शुद्धिकरण प्रक्रम में किया जाता है । आयोडीन का विलयन एंटीबायोटिक के रूप में घावों पर लगाया जाता है ।

धातु के भौतिक गुण :-


 भौतिक स्थिति :- धातुएँ सामान्यतः ठोस तथा कठोर होती हैं । प्रत्येक धातु की कठोरता अलग – अलग होती है । धातुओं का गलनांक अधिक होता है ।

चमक :- अपने शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है । धातु के इस गुणधर्म को धात्विक चमक कहते हैं ।

आघातवर्ध्यता :- धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है । इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते हैं । सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं ।

तन्यता :- धातु के पतले तार के रूप में खिंचने की क्षमता को तन्यता कहा जाता है । सोना सबसे अधिक तन्य धातु है , एक ग्राम सोने से 2 km लंबा तार बनाया जा सकता है ।


चालकता :- धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं । सिल्वर तथा कॉपर अच्छे चालक हैं ।

ध्वानिक :- सामान्यत : धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर एक विशेष आवाज़ उत्पन्न करती हैं , अत : उन्हें ध्वानिक कहते हैं ।

अधातुओ के भौतिक गुण :-

भौतिक स्थिति :- अधातुएँ सामान्यतः या तो ठोस या फिर गैसें होती हैं ।

चमक :- अधातुओं में चमक नहीं होती हैं ।

नोट : अपवाद :- आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है ।

आघातवर्ध्यता :- अधातुएँ आघातवर्धनीय नहीं होती हैं । अधातुऐं भंगुर होती हैं अतः इन्हें पीटने पर ये टूट जाती हैं ।

तन्यता :- अधातुएँ तन्य नहीं होती है ।

चालकता :- अधातुएँ विद्यतु तथा ऊष्मा की कुचालक होती है ।

धातुओं का निष्कर्षण :-

अभिक्रियाशीलता के आधार पर हम धातुओं को निम्न तीन वर्गों में विभाजित कर सकते हैं :-

  • निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ
  • मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ
  • उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ ।
  • प्रत्येक वर्ग में आने वाली धातुओं को प्राप्त करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है ।
  • सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ सबसे कम अभिक्रियाशील होती हैं । ये स्वतंत्र अवस्था में पाई जाती हैं । उदाहरण के लिए , गोल्ड ( सोना ) , सिल्वर ( चाँदी ) , प्लैटिनम एवं कॉपर ( ताँबा ) स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं । कॉपर एवं सिल्वर , अपने सल्फाइड या ऑक्साइड के अयस्क के रूप में संयुक्त अवस्था में भी पाए जाते हैं ।
  • सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर की धातुएँ ( K , Na , Ca , Mg एवं Al ) इतनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं कि ये कभी भी स्वतंत्र तत्व के रूप में नहीं पाई जातीं । अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण निम्न चरणों में होता है

भर्जन :- सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है । इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं ।

तापन जिंक सल्फाइड अयस्क का भर्जन :- 2ZnS(s) + 3O₂(g) [ तापन → ] 2ZnO(s) + 2SO₂(g)

निस्तापन :- कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है । इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है ।

तापन जिंक के कार्बोनेट अयस्क का निस्तापन :- ZnCO₃(s) [ तापन → ] ZnO(s) + CO₂(g)

अपचयन :- कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर भर्जन या निस्तापन से प्राप्त धातु ऑक्साइडों से धातु प्राप्त की जाती है । उदाहरण के लिए जब जिंक ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म किया जाता है , तो यह जिंक धातु में अपचयित हो ता है ।

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