NCERT Class 10th Science Notes Chapter-2 (Acid, Base)

Class 10 science Chapter 2 अम्ल , क्षारक एवं लवण

अम्ल की परिभाषा :- अम्ल को अंग्रेजी भाषा में ऐसिड कहते हैं , ऐसिड शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘ एसिड्स ’ ( Acidus ) से हुई है , जिसका अर्थ खट्टा ( Sour ) होता है । अतः हम कह सकते हैं कि जो पदार्थ स्वाद में खट्टे होते हैं वे अम्ल होते हैं ।

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अम्ल के गुण :-

  • स्वाद में खट्टा होते हैं ।
  • नीले लिटमस को लाल कर देते हैं ।
  • जलीय विलयन में H+ आयन देता ।


  • जलीय विलयन में विधुतधारा प्रवाहित करना ।
  • धातु के साथ अभिक्रिया कर H₂ निष्कासित करना ।
  • धातु कार्बोनिट / हाइडोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया कर CO₂ निष्कासित करना ।
  • कुछ धातु ऑक्साइड अम्ल में साथ अभिक्रिया कर लवण और जल बनाना ।

अम्ल के प्राकृतिक स्रोत :-


  • नीबू ( साइट्रिक अम्ल )
  • टमाटर ( ऐस्कार्बिक अम्ल )
  • अंगुर ( टार्टरिक अम्ल )
  • सिरका ( ऐसिटिक अम्ल )
  • दूध ( लेक्टिक अम्ल )
  • इमली ( टार्टरिक अम्ल )
  • सेब ( मैलिक अम्ल )

अम्लों के प्रकार :-

  • प्रबल अम्ल
  • दुर्बल अम्ल
  • सान्द्र अम्ल
  • तनु अम्ल

प्रबल अम्ल :-

  •  वे अम्ल , जो जलीय विलयन में पूर्णत : आयनित हो जाते है , प्रबल अम्ल कहलाते हैं । सल्फ्यूरिक अम्ल ( H₂SO₄ ) , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HCI ) नाइट्रिक अम्ल ( HNO₃ ) , हाइड्रोब्रोमिक अम्ल आदि प्रबल अम्लों के उदाहरण है ।
  •  प्रबल अम्लों में प्रोटॉन अर्थात् हाइड्रोजन आयन ( H + ) त्याग करते की उच्च क्षमता होती है अर्थात् प्रबल अम्ल अपने संघटक तत्वों के आयनों में विखण्डित हो जाते हैं ।

दुर्बल अम्ल :-

  •  अम्ल , जो जलीय विलयन में पूर्णत : आयनित न हो कर आंशिक रूप से आयनित होते हैं , दुर्बल अम्ल कहलाते हैं । एसिटिक अम्ल ( CH₃COQH ) , फॉर्मिक अम्ल ( HCOOH ) , हाइड्रोजन सल्फाइड ( H₂S ) आदि दुर्बल अम्लों के उदाहरण हैं ।
  •  दुर्बल अम्ल अपने हाइड्रोजन आयनों ( H+ ) का पूर्णत : त्याग नहीं करते हैं । समान सांद्रता पर दुर्बल अम्लों का pH मान प्रबल अम्लों से अधिक होता है ।

 सान्द्र अम्ल :-

  • जिसमें अम्ल अधिक मात्रा में होता है , जबकि जल अल्प मात्रा में होता है ।

तनु अम्ल :-

  •  जिसमें अम्ल अल्प मात्रा में होता है , जबकि जल अधिक मात्रा में होता है ।

 लिटमस पत्र :-

  • लिटमस विलयन के रूप में तथा कागज़ की पट्टियों के रूप में उपलब्ध होता है , इन कागज की पट्टियों को लिटमस पत्र कहते हैं ।
  • लिटमस पत्र दो रंगों का होता है नीला एवं लाल , अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है जबकि क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है

 लवण :-

  •  धातु , अम्लों से हाइड्रोजन परमाणुओं का हाइड्रोजन गैस के रूप में विस्थापन करती है और एक यौगिक बनाता है जिसे लवण कहते हैं ।
  • लवण ठोस अवस्था में मिलते हैं ।


  • सामान्यतः लवण उदासीन होते हैं ।
  • लवणों के जलीय विलयन विद्युत के सुचालक होते हैं ।

 अम्ल के साथ धातु की अभिक्रिया :-

  • अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन
  • 2HCl + Zn → ZnCl₂ + H₂

 क्षारक के साथ धातु की अभिक्रिया :-

  • क्षार + धातु → लवण + हाइड्रोजन
  • 2NaOH + Zn → Na₂ZnO₂ + H₂

उदासीन :-

  •  ऐसे पदार्थ जो लाल अथवा नीले लिटमस पत्र के रंग को परिवर्तित नहीं करते हैं , उदासीन कहलाते हैं ।


  •  ऐसे पदार्थ न तो अम्लीय होते हैं और न ही क्षारकीय होते हैं ।
  •  जैसे :- नमक , नौसादर , केल्शियम क्लोराइड , सोडियम कार्बोनेट , सोडियम बाइकार्बोनेट आदि ।

 pH स्केल :-

  •  किसी विलयन में उपस्थित H⁺ आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया जिसे pH स्केल कहते हैं ।
  • pH में p है ‘ पुसांस ‘ ( Potenz ) जो एक जर्मन शब्द है , जिसका अर्थ होता है शक्ति । अगर :-
  • PH = 7 → उदासीन विलयन
  • PH < 7 → अम्लीय विलयन
  • PH > 7 → क्षारीय विलयन

दैनिक जीवन में pH का महत्त्व :-

  •  पौधे एवं पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं । :-
  •  हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास ( range ) के बीच कार्य करता है ।
  •  मिट्टी का pH :-
  •  अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है । यदि किसी स्थान की मिट्टी का pH कम या अधिक हो तो किसान उसमें आवश्यकतानुसार अम्लीय या क्षारीय पदार्थ मिलाते हैं ।

 हमारे पाचन तंत्र का pH :-

  •  हमारा उदर ( stomach ) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HCI ) उत्पन्न करता है जो भोजन के पाचन में सहायक होता है ।
  •  अपच की स्थिति में उदर अधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न करता है जिसके कारण उदर में दर्द व जलन का अनुभव होता है ।
  •  इस दर्द से मुक्त होने के लिए ऐन्टैसिड ( antacid ) जैसे क्षारकों का उपयोग किया जाता है जो अम्ल की अधिक मात्रा को उदासीन करता है । जैसे ( मिल्क ऑफ मैग्नीशिया )

 pH परिवर्तन के कारण दंत क्षय :-

  •  मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है ।
  •  दाँतों का इनैमल ( दन्तवल्क ) कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है जो कि शरीर का सबसे कठोर पदार्थ होता है , यह जल में नहीं घुलता लेकिन मुँह की pH का मान 5.5 से कम होने पर संक्षारित हो जाता है ।
  •  क्षारकीय दंत – मंजन का उपयोग करने से अम्ल की आधिक्य मात्रा को उदासीन किया जा सकता है

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